crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी (Vajrgad Fort Information in Hindi)

बुधवार, १४ जानेवारी, २०२६

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी (Vajrgad Fort Information in Hindi)

 वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी

(Vajrgad Fort Information in Hindi)

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


• स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में, पुरंदर तालुका के अंतर्गत सासवड के पास वज्रगढ़ स्थित है। यह किला पुरंदर किले का जोड़ किला (जुड़वा किला) है।

• ऊँचाई :

इस किले की औसत ऊँचाई लगभग 1500 मीटर है।

वज्रगढ़ किले तक पहुँचने के मार्ग :

• पुणे एक अंतरराष्ट्रीय शहर है, जो सड़क, रेलमार्ग और हवाई सेवाओं द्वारा अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है। यहाँ से नारायणपुर मार्ग द्वारा वज्रगढ़ के निकट पहुँचा जा सकता है।

• वज्रगढ़, पुरंदर किले का जोड़ किला है। पुरंदर किले से वज्रगढ़ पहुँचा जा सकता है, लेकिन वर्तमान में पुरंदर किला भारतीय सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत आता है, इसलिए पुरंदर से वज्रगढ़ जाना संभव नहीं है और वहाँ प्रवेश निषिद्ध है।

• कुछ ट्रेकर्स खोमणे बस्ती से वज्रगढ़ तक जाकर लौटते हैं, लेकिन यह मार्ग अत्यंत कठिन है।

• पुणे से दिवेघाट मार्ग – सासवड मार्ग – नारायणपुर रोड पर पुरंदर–वज्रगढ़ फाटा है। वहाँ से आगे वज्रगढ़ की तलहटी में स्थित खोमणे बस्ती से संकरी पगडंडी द्वारा जंगल और झाड़ियों से होते हुए वज्रगढ़ किले तक पहुँचा जा सकता है।

वज्रगढ़ किले पर देखने योग्य स्थान :

• खोमणे बस्ती :

वज्रगढ़ की तलहटी में स्थित यह रामोशी समाज के लोगों का एक छोटा सा गाँव है। यहीं से पगडंडी द्वारा वज्रगढ़ किले की चढ़ाई शुरू होती है।

• उमाजी नाईक स्मारक :

ब्रिटिश शासन के समय अंग्रेज़ सरकार तथा अन्यायकारी ज़मींदारों के विरुद्ध आंदोलन कर सशस्त्र संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी उमाजी नाईक के जन्म और उनके अंग्रेज़ों के खिलाफ किए गए कार्यों की जानकारी देने वाला यह स्थान है। उनकी स्मृति में यहाँ उमाजी नाईक का स्मारक बनाया गया है।

• संकरा और कठिन मार्ग :

उमाजी नाईक स्मारक के दर्शन के बाद, वहाँ से एक पगडंडी द्वारा वज्रगढ़ की दिशा में आगे बढ़ने पर जंगल की झाड़ियों से भरा ऊँच-नीच वाला कठिन मार्ग मिलता है। इस मार्ग से जाते समय स्थानीय लोगों की सहायता लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि रास्ता बहुत खतरनाक और दुर्गम है।

• किले की प्राचीर (तटबंदी) :

इस मार्ग से ऊपर पहुँचने पर किले की प्राचीर दिखाई देती है। यह आज भी मजबूत अवस्था में है और इसमें जगह-जगह पर तोपों के लिए बनाई गई जंग्याएँ दिखाई देती हैं।

• महादरवाज़ा :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


प्राचीर के किनारे आगे बढ़ने पर दो मजबूत बुर्ज दिखाई देते हैं। इन बुर्जों के पास अत्यंत सुंदर गोमुखी आकार की सीढ़ीनुमा संरचना देखने को मिलती है। इस मार्ग से आगे जाने पर भीतर की ओर एक विशाल, ऊँचा और भव्य पत्थर का दरवाज़ा दिखाई देता है। दरवाज़े के अंदर पहरेदारों के लिए बनाई गई देवड़ियाँ (गार्ड रूम) आज भी अच्छी स्थिति में हैं। यह दरवाज़ा और देवड़ियाँ किले के मध्ययुगीन काल की साक्षी हैं।

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


• चट्टानी शिखर (कातळ सुळके) :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


महाद्वार से भीतर प्रवेश करने के बाद सीढ़ीनुमा मार्ग से आगे बढ़ने पर ऊँचे चट्टानी शिखर दिखाई देते हैं। इस स्थान पर चढ़ना अत्यंत कठिन है। इनके नीचे चट्टानों के बीच भूमिगत खोखले भाग (गुहाएँ/खोबणियाँ) देखने को मिलती हैं।

• राजगद्दी :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


चट्टानी चबूतरे के ऊपरी हिस्से पर एक समतल बैठने का स्थान दिखाई देता है। इस स्थान पर बैठकर राजा और अन्य प्रमुख अधिकारी निगरानी रखते थे और आसपास के मावलों को आदेश देते थे। ब्रिटिश काल में क्रांतिकारी उमाजी नाईक भी अपने साथियों के साथ यहीं बैठकर अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध योजनाएँ बनाते थे।

• मेहराबदार प्रवेशद्वार (कमानी प्रवेशद्वार) :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


किले पर आगे की ओर ढह चुकी कुछ संरचनाएँ दिखाई देती हैं। समय के साथ यहाँ साधारण तथा काँटेदार नागफनी (कैक्टस) के पौधे उग आए हैं। इन्हीं के बीच आगे बढ़ने पर एक मेहराबदार प्रवेशद्वार दिखाई देता है।

• माची का बुर्ज :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


किले पर माची का एक बुर्ज दिखाई देता है। समय के साथ इसका काफी हिस्सा ढह चुका है। शिवकाल में शत्रुओं की तोपों के हमलों के कारण भी इन बुर्जों को भारी नुकसान पहुँचा था, जिससे कई बुर्ज गिर गए।

• तीन जल टंकियाँ :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


वज्रगढ़ किले पर तीन जल टंकियाँ देखने को मिलती हैं। मध्ययुगीन काल में ये टंकियाँ पीने और दैनिक उपयोग के पानी का मुख्य स्रोत थीं। आज भी भीषण गर्मी के मौसम में यहाँ पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहता है।

• मारुति मंदिर :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


विशाल जल टंकी के पास एक मारुति (हनुमान) मंदिर भी देखने को मिलता है। सिंदूरी रंग से रंगी हुई सुंदर मूर्ति शक्ति और बलोपासना का प्रतीक है।

• रुद्रेश्वर महादेव मंदिर :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


हनुमान मंदिर के पास ही एक शिव मंदिर स्थित है। यद्यपि छत के अंदर का प्लास्टर कुछ हद तक गिर चुका है, फिर भी यह मजबूत पत्थर से बना मंदिर आज भी इतिहास की याद दिलाता है। भीतर महादेव का पिंड है और बाहर नंदी की मूर्ति स्थापित है।

उमाजी नाईक अपने साथियों के साथ यहाँ निवास करते थे और सामूहिक बलोपासना किया करते थे, इसलिए इस मंदिर को “तालीम” भी कहा जाता था।

• चोरवाट (गुप्त मार्ग) :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


किले पर एक स्थान पर प्राचीर से सटा हुआ एक भूमिगत गुप्त मार्ग दिखाई देता है। किले पर आक्रमण होने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए यह मार्ग अत्यंत उपयोगी था। यह मार्ग घाटी के पास स्थित जंगल में खुलता था, जिससे शत्रुओं को चकमा देकर निकलना आसान हो जाता था।

• पूर्व दिशा का चिलखती बुर्ज :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


किले की पूर्व दिशा में दोहरी प्राचीर से युक्त एक चिलखती बुर्ज दिखाई देता है। मध्ययुगीन काल में इस बुर्ज का उपयोग पूर्वी प्राचीर की रक्षा, किले पर होने वाले आक्रमणों को विफल करने तथा निगरानी के लिए किया जाता था। यहाँ “बुर्ज के भीतर बुर्ज” जैसी दोहरी संरचना देखने को मिलती है।

• प्राचीर (तटबंदी) :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


समय के साथ तथा किले की उपेक्षा के कारण आज कई स्थानों पर प्राचीर ढह चुकी है। कुछ जगहों पर घने पेड़-पौधे और झाड़ियाँ उग आई हैं, जिससे कई संरचनाएँ जर्जर अवस्था में दिखाई देती हैं।

• बुर्ज :

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


किले के कमजोर हिस्सों पर बने कई बुर्ज आज ढह चुके हैं। बचे हुए पत्थर के निर्माण से उनके अस्तित्व का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। इन बुर्जों में जंग्याएँ और फाँजियाँ (तोपों व हथियारों के लिए बनी खिड़कियाँ) दिखाई देती हैं।

• अन्य स्थापत्य अवशेष :

किले पर उगी घनी झाड़ियों के कारण निवास के लिए बनी संरचनाओं के अवशेष स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।


• किले की यात्रा (Fort Trekking) के दौरान कई जरूरी सामान की आवश्यकता होती है। आप नीचे दी गई वेबसाइट के माध्यम से इन्हें देख सकते हैं और खरीद सकते हैं।

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वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी:

• प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर पहले इंद्रदेव ने तपस्या की थी। इसलिए इस स्थान के पास स्थित किले को पुरंदर कहा जाने लगा। साथ ही इंद्रदेव के शस्त्र वज्र के कारण इस किले को वज्रगढ़ नाम दिया गया।

• आगे चलकर यह किला यादव वंश के शासन के अधीन था।

• ईस्वी सन 1384 में सुल्तानशाही काल के दौरान यहाँ एक ठाणे (सैन्य चौकी) की स्थापना की गई।

• सुल्तानशाही के पतन के बाद यह किला बहमनी राजवट के अधीन आ गया।

• हसन गंगू बहमनी के पुत्र मुहम्मद ने यहाँ निर्माण कार्य करवाया, जिसमें एक बुर्ज और एक प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया।

• आगे चलकर ईस्वी सन 1449 में निजामशाही के शासक मलिक अहमद ने इस किले को अपने अधिकार में लिया।

• निजामशाही के अंत के बाद यह किला बीजापुर की आदिलशाही के अधीन चला गया।

• ईस्वी सन 1550 में आदिलशाह ने इस किले को जीत लिया।

• जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना की, तब आदिलशाह ने शाहाजी महाराज को बंदी बना लिया। उस समय शिवाजी महाराज को रोकने के लिए फत्तेखान को भेजा गया। संघर्ष के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में शिवाजी महाराज ने पुरंदर को चुना। उस समय पुरंदर–वज्रगढ़ किला महादजी नीलकंठ के अधिकार में था। उनके और उनके भाई के बीच इस स्थान पर प्रभुत्व को लेकर विवाद चल रहा था। इसी का लाभ उठाकर छत्रपति शिवाजी महाराज ने यह किला अपने अधिकार में ले लिया। उन्होंने न केवल फत्तेखान का बंदोबस्त किया, बल्कि शाहाजी महाराज की रिहाई भी करवाई।

शिवकाल में यहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी रामोशी समाज के लोगों को सौंपी गई थी।

वज्रगढ़ किले की ऐतिहासिक जानकारी  (Vajrgad Fort Information in Hindi)


• ईस्वी सन 1665 में मुगल सरदार मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने पुरंदर को घेर लिया। दिलेरखान ने पुरंदर और वज्रगढ़ पर तोपों की भारी गोलाबारी की और माची पर अधिकार कर लिया। मराठों और मुगलों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। इसका परिणाम 11 जून 1665 को हुए पुरंदर के तह में हुआ। इस संधि के अंतर्गत छत्रपति शिवाजी महाराज ने 23 किले और चार लाख होन की जागीर मुगलों को दी, और स्वराज्य में केवल 12 किले शेष रहे।

• मुगलों को दिए गए किले:

पुरंदर, वज्रगढ़ (रुद्रमाळ), कोंढाणा, कर्नाळा, लोहगढ़, इसागढ़, तुंग, तिकोणा, रोहिडा, नरदुर्ग, माहुली, भांडारदुर्ग, पालसखोल, रूपगढ़, बख्तगढ़, मरकगढ़, माणिकगढ़, सरूपगढ़, सकरगढ़, अंकोला, सोनगढ़, मानगढ़।

• स्वराज्य में शेष रहे किले:

राजगढ़, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, विजयदुर्ग, विशाळगढ़, तोरणा, प्रतापगढ़, लिंगाणा, व्याघ्रगढ़, तळगढ़, घोसाळगढ़, सुवर्णदुर्ग।

• 8 मार्च 1907 को निळोपंत मुजुमदार ने पुनः इस किले को स्वराज्य में सम्मिलित किया।

• छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद औरंगज़ेब ने पुरंदर के साथ यह किला भी पुनः जीत लिया।

• इसके बाद शंकर नारायण सचिव ने इस किले को फिर से स्वराज्य में शामिल किया।

• आगे चलकर ईस्वी सन 1818 में अंग्रेजों ने मराठों से यह किला अपने कब्जे में ले लिया।

• अंग्रेजी शासन के दौरान इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर अंग्रेज सरकार और ज़मींदारों द्वारा अत्याचार किए जाते थे। इसके विरुद्ध क्रांतिकारी उमाजी नाईक ने सशस्त्र आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने इसी क्षेत्र में रहकर अनेक मराठा वीरों को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चलाया। उस समय उमाजी नाईक अपने साथियों के साथ वज्रगढ़ पर रहते थे, गुप्त योजनाएँ बनाते थे तथा क्रांतिकारियों को शस्त्र प्रशिक्षण और बलोपासना के पाठ पढ़ाते थे।

• अंततः अंग्रेजों ने इस आंदोलन को दबा दिया।

• भारत के स्वतंत्र होने के बाद यह किला स्वतंत्र भारत में सम्मिलित हुआ।

• वर्तमान समय में पुरंदर किले पर भारतीय सैन्य प्रशिक्षण केंद्र होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से वज्रगढ़ जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यहाँ भारतीय सैनिक अभ्यास और प्रशिक्षण करते हैं।

• इस प्रकार वज्रगढ़ किले की यह विस्तृत ऐतिहासिक जानकारी है। Vajrgad kille ke bare me jankari hindi me 


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