राधानगरी अभयारण्य / दाजीपूर अभयारण्य पुरी जाणकारी हिंदी मे
Radhanagri abhyarany/dajipur abhyarany jankari hindi me
🌏 भौगोलिक स्थिति
राधानगरी / दाजिपुर अभयारण्य महाराष्ट्र राज्य के कोल्हापुर जिले के पश्चिम भाग में, सह्याद्री पर्वतश्रेणी (पश्चिम घाट) के परिसर में स्थित है। अभयारण्य के पश्चिम में सिंधुदुर्ग जिले के कुडाळ–कणकवली–फोंडा घाट क्षेत्र लगता है, जबकि दक्षिण दिशा में भुदरगड तालुका का चाफोडी और आसपास का क्षेत्र फैला हुआ है। लगभग 351.16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस जंगल से दूधगंगा, भोगावती, तुळशी और धामणी जैसी नदियों का उद्गम होता है। इन नदियों द्वारा वर्षा ऋतु में लाया गया पानी कालम्मावाड़ी, राधानगरी, धामोड़ और म्हासुर्ली जैसे जलाशयों में संग्रहित होता है, जिससे यह क्षेत्र अत्यंत जलसमृद्ध माना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह पूरा अभयारण्य घने जंगलों, पर्वतरांगों और जलप्रवाहों से समृद्ध है। करवीर संस्थान के 1947 में स्वतंत्र भारत में विलीन होने के बाद यह अभयारण्य भी भारत का हिस्सा बना और 1958 में भारत सरकार ने इसे आधिकारिक अभयारण्य का दर्जा दिया। आगे चलकर 2012 में यूनेस्को ने इसकी जैवविविधता को मान्यता देते हुए इसे विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया। वाकी महादेव और देवी दिर्बाची की पवित्र देवरेई भी इसी विशाल वन क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है।
🌿 राधानगरी की ऊँचाई का वैभव और वनसंपदा
राधानगरी कोल्हापुर जिले का शांत, हरा-भरा हिल स्टेशन माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 900 से 1000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह स्थान सचमुच भटकने वाले यात्रियों और प्रकृति-प्रेमी पर्यटकों की पंढ़री कहलाते। ऊँचे पहाड़, ठंडी हवा और घनी हरियाली के कारण राधानगरी का वातावरण वर्षभर मनोहारी बना रहता है।
🌳 वनस्पतियों की विविध दुनिया
यहाँ का जंगल सदाबहार और अर्ध-सदाबहार प्रकृति का है और जैव-विविधता से भरपूर है। जंगल में खड़े विशाल वृक्ष, उनके चारों ओर फैली वेलियाँ, गहरी छाया और अनेक औषधीय गुणों वाली वनस्पतियाँ यहाँ की खासियत हैं।
यहाँ मिलने वाली प्रमुख वनस्पतियों में
आम, करंज, जामुन, कटहल, उंबर, शीशम, हरड़ा, बेहड़ा, अंजन, एन, आंवला जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियाँ शामिल हैं। इन सभी ने पूरे वन क्षेत्र को अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भर दिया है।
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| राऊतवाडी धबधबा |
✨ जुगनुओं की जादुई दुनिया
गर्मी के अंत में और बारिश की शुरुआत में इस जंगल में कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है। इनमें सबसे आकर्षक दृश्य होता है — अनेक प्रकार के जुगनू। इनके अंडा, लार्वा, प्यूपा और प्रौढ़ अवस्था तक की जैविक प्रक्रिया यहाँ देखी जा सकती है। शाम ढलते ही और रात में पेड़ों के बीच दिखने वाली जुगनुओं की चमक राधानगरी का अनोखा आकर्षण है।
🌧️ ऋतुओं के अनुसार बदलता सौंदर्य
जुलाई से सितंबर — घने वर्षावन, ऊँचे पर्वतों से गिरते सुंदर झरने, धुंध और ताज़ी हरियाली का अनोखा संगम।
श्रावण — रंग-बिरंगे फूलों की अनेक प्रजातियों का बहरापन।
अक्टूबर से जनवरी — सर्दियों में सूखी घास के मैदान, स्वच्छ जलस्रोत और कालम्मावाड़ी व राधानगरी बांध में भरा पानी।
गर्मी / वसंत — फूलों और फलों से लदे पेड़-पौधे, हरी-भरी वनसंपदा और बड़ी संख्या में दिखने वाले पक्षी।
🌄 तीनों ऋतुओं में प्रकृति की रंगत
राधानगरी का जंगल सालभर ऋतुओं के साथ अपना रूप बदलता रहता है —
कभी घनी हरियाली,
कभी धुंध में लिपटे उँचे पहाड़,
कभी फूलों का बहरापन,
तो कभी जुगनुओं की रोशनी से चमकता रात का जादुई नज़ारा।
प्रकृति के हर रंग का भरपूर आनंद यहाँ महसूस किया जा सकता है।
🐾 प्राणिजीवन (Animals)
राधानगरी अभयारण्य में प्राणिजीवन की उल्लेखनीय विविधता देखने को मिलती है। यहाँ रानकुत्ते सामूहिक शिकार करने वाले चतुर शिकारी हैं, ससे तेज़ और फुर्तीले जीव होते हैं, तथा उदबिलाव और जंगली बिल्ली रात में सक्रिय रहकर कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगली सूअर जमीन खोदकर जंगल की खाद्य श्रृंखला को सहायता देते हैं, जबकि शेकरू गिलहरी अपनी अद्भुत छलांग और आकर्षक रंगों से विशेष ध्यान खींचती है। लंगूर समूह में रहकर सतत सतर्कता और निरीक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं। भेकर अवसरवादी शिकारी होता है और मृत प्राणियों के अवशेष खाकर जंगल को स्वच्छ रखता है। इसके अलावा सांभर, पिसोरी हिरण तथा छोटे हिरण शांत स्वभाव वाले प्राणी यहाँ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। दुर्लभ पट्टेदार बाघ और भालू का अस्तित्व इस पारिस्थितिकी तंत्र की प्राकृतिक स्थिरता दर्शाता है। अभयारण्य का सबसे बड़ा आकर्षण गवा है, जिसका मुख्य आहार जंगली करवी नामक वनस्पति है।
🐦 पक्षीजीवन (Birds)
राधानगरी अभयारण्य में 235 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिससे यह पक्षीप्रेमियों के लिए प्रकृति का अनमोल खजाना साबित होता है। कोतवाल अपनी आवाज़ की नकल करने की क्षमता के कारण जंगल का चेतावनी देने वाला पक्षी माना जाता है, जबकि दयाल अपनी मधुर धुनों के लिए प्रसिद्ध है। पाणथल क्षेत्रों में खंड्या तेज़ी से पानी में गोता लगाकर शिकार करता है, और पिंगला रात में बेहतरीन दृष्टि से शिकार कर पाता है। हरे तोते झुंड में रहकर जंगल को रंगीन बनाते हैं; कोयल अपनी मीठी कूजन से गर्मियों का वातावरण सुखद करती है। मोर अपनी रंग-बिरंगी पंखों की सजावट से विशेष आकर्षण का केंद्र होता है, जबकि बगुले पानी में शांत खड़े होकर मछलियाँ पकड़ते दिखते हैं। हॉर्नबिल अपनी बड़ी चोंच से फल खाकर बीज प्रसार करता है तथा जंगल के पुनर्जीवन में अहम योगदान देता है।
🐍 सरीसृप और उभयचर (Reptiles & Amphibians)
अभयारण्य में सरीसृपों की भी बड़ी विविधता पाई जाती है, जहाँ लगभग 50 सरीसृप और 20 उभयचर जीव मिलते हैं। कोबरा, घोणस, भारतीय नाग और मण्यार जैसे साँप जंगल की खाद्य श्रृंखला के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। घोरपड़ एक शक्तिशाली गोह (मॉनिटर लिज़र्ड) है और प्रायः जलस्रोतों के पास दिखाई देती है, जबकि मगर नदी किनारे शांत बैठी दिखती है। घने जंगलों में पाए जाने वाले मेंढक तथा विभिन्न प्रकार के कोस्टी (कोड़ी/करिडे) जैविक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। काजवा (जुगनू) कई कोड़ी और मेंढकों का मुख्य भोजन होने के कारण यहाँ सुंदर और स्वाभाविक खाद्य श्रृंखला का निर्माण होता है।
🌿 दाजीपुर–राधानगरी अभयारण्य के पर्यटन स्थल
दाजीपुर जंगल, राधानगरी बांध परिसर और सह्याद्री के घने वन क्षेत्र में अनेक ऐसे स्थान हैं जो प्रकृति, इतिहास और जैवविविधता का अद्वितीय संगम अनुभव करने का अवसर देते हैं। नीचे इस क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों का विस्तृत परिचय दिया है।
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| बेनझीर व्हीला |
🛕 1. उगवाई मंदिर – देवरााई का पवित्र स्वरूप
दाजीपुर जंगल में स्थित उगवाई मंदिर दिव्य शक्ति का प्रतीक और स्थानीय श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र माना जाता है। यह मंदिर देवराई (Sacred Grove) क्षेत्र में होने के कारण यहाँ शिकार और वृक्षों की कटाई पर पूर्णतः प्रतिबंध है।
इसी जंगल में वाकी और दिरबा जैसी प्रसिद्ध देवराइयाँ भी स्थित हैं, जो जैवविविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
🦌 2. सांबर कोंड – प्रकृति प्रेमियों के लिए सुंदर स्थान
सांबर कोंड सह्याद्री के घने जंगलों के बीच स्थित एक अत्यंत रमणीय स्थान है।
यहाँ आपको—
विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ
रंग-बिरंगी तितलियों के समूह
शांत और निर्मल प्राकृतिक वातावरण
देखने को मिलते हैं।
प्रकृति छायाचित्रण, ट्रेकिंग और वनजीव निरीक्षण के लिए यह एक उत्कृष्ट स्थल है।
🌊 3. लक्ष्मी प्वाइंट – राधानगरी बैकवॉटर का अद्भुत दृश्य
राधानगरी बांध को लक्ष्मी तालाब भी कहा जाता है। इसके बैकवॉटर क्षेत्र में स्थित लक्ष्मी प्वाइंट अविस्मरणीय प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
यहाँ के वॉच टॉवर से—
पाणलोट क्षेत्र की हरियाली
विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ
पक्षियों और वन्यजीवों का निरीक्षण
बहुत ही अच्छी तरह किया जा सकता है।
🏞️ 4. कोंकण कडा – सह्याद्री की भव्य पर्वतरचना
दाजीपुर से आगे फोंडा घाट के ऊँचे क्षेत्र में स्थित कोंकण कडा सह्याद्री पर्वतों का अद्वितीय और मोहक दृश्य प्रस्तुत करता है।
यहाँ से—
सह्याद्री की विशाल घाटियाँ
सिंधुदुर्ग जिले का फोंडा क्षेत्र
बांध के पाणलोट क्षेत्र का विहंगम दृश्य
स्पष्ट दिखाई देता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और हवाई छायाचित्रण के लिए यह स्थल अत्यंत लोकप्रिय है।
🌾 5. सावराई सडा – कात्याळ पठार का अनोखा सौंदर्य
दाजीपुर से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सावराई सडा ऊँचे घाटमाथा क्षेत्र का छोटा लेकिन अनोखा पठार है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ :
फैला हुआ कात्याळ पठार
जगह-जगह छोटे कात्याळ पानी के कुंड
कम उपजाऊ मिट्टी और छोटे कद की घास
केवल वर्षा ऋतु में जीवित रहने वाली वनस्पतियाँ
यहाँ के छोटे जलाशय कई वन्यजीवों की पानी की आवश्यकता पूरी करते हैं।
इस क्षेत्र में ऐन, किंजळ, गेळा, खैर आदि वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। पूरा क्षेत्र खुरदुरे जंगल का अद्भुत उदाहरण है।
🐅 6. बाघाचे पानी – वन्यजीव निरीक्षण का विशेष स्थल
जंगल के हृदय में स्थित बाघाचे पानी वन्यजीवों के निरीक्षण हेतु बने वॉच टॉवर के लिए प्रसिद्ध है।
यहाँ से—
विभिन्न वन्यप्राणी
पक्षियों के समूह
सह्याद्री का शांत प्राकृतिक दृश्य
बहुत निकट से देखा जा सकता है।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह स्थान स्वर्ग समान माना जाता है।
🏰 7. हती महाल – शाहू महाराज के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा
करवीर संस्थान के शासनकाल में निर्मित हती महाल शाहू महाराज द्वारा साठमारी (हाथी नियंत्रक खेल) के लिए बनाया गया था।
साथ ही यहाँ हाथियों को बांधने के लिए निर्मित हत्तीशाला (Elephant Stable) भी मौजूद है।
इसकी विशेषताएँ—
भव्य और ऐतिहासिक वास्तुकला
पूर्व में करवीर संस्थान का भाग
बाद में पाटबंधारे विभाग की आवासीय इमारत
वर्तमान में यह संरचना उपेक्षित है, लेकिन मरम्मत करके इसे शाहू कालीन म्यूज़ियम के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इतिहास प्रेमियों के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
🌿 राधानगरी / दाजीपुर अभयारण्य – महत्वपूर्ण जानकारी (हिंदी में)
तपोवन
इस घने जंगल क्षेत्र में तपोवन स्थित है, जहाँ गगनगिरी महाराज का आश्रम मौजूद है।
यहाँ शांति, साधना और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत अनुभव मिळता है।
भोगावती नदी परिसर
धरण के पास भोगावती नदी का पात्र उथला दिखाई देता है।
बारिश के मौसम को छोड़ दिया जाए तो बाकी समय यहाँ का पानी ज्यादा गहरा नहीं रहता।
इस जगह पर नदी स्नान और तैराकी का आनंद लिया जा सकता है।
🚗 राधानगरी / दाजीपुर अभयारण्य तक कैसे पहुँचे
कोल्हापुर मार्ग
कोल्हापुर शहर तक विमान, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
कोल्हापुर से राधानगरी लगभग साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
विमानतल मार्ग
कोल्हापुर / उज्जलईवाडी विमानतल से राधानगरी लगभग सत्तर किलोमीटर दूर है।
बेलगांव मार्ग
बेलगांव से निपाणी – आदमापुर – मुधाळ तिट्टा मार्ग होकर राधानगरी की सीधी पहुँच बनती है।
गोवा मार्ग
गोवा शहर से कणकवली – फोंडा – फोंडा घाट रास्ते से भी राधानगरी पहुँचा जा सकता है।
मुंबई / पुणे मार्ग
मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों से हवाई, रेल और सड़क मार्ग द्वारा पहले कोल्हापुर पहुँचा जा सकता है।
कोल्हापुर से आगे राधानगरी तक आसानी से यात्रा की जा सकती है।
🌄 राधानगरी सफर के फायदे
इस हरित-समृद्ध वातावरण में मानसिक तनाव दूर होता है।
जंगल में विशेष रूप से गौर (गवा/बाइसन) जैसे वन्यजीवों के दर्शन होते हैं।
विभिन्न प्रकार के तितलियों और जुगनुओं की प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं।
कई प्रकार के पक्षी, सरीसृप, विशाल वृक्ष और लताएँ दिखाई देती हैं जिनका अवलोकन किया जा सकता है।
वनस्पतियों का औषधीय महत्व जानने का अवसर मिलता है।
प्राकृतिक वातावरण, शुद्ध हवा और स्वच्छ पानी के कारण स्वास्थ्य में सुधार होता है।
स्थानीय कोल्हापुरी और घाटी भोजन का स्वाद लिया जा सकता है।
यहाँ गिद्धों की तीन प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।
इस क्षेत्र की भू-रचना, नदी व्यवस्था और भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन किया जा सकता है।
🗓️ सफर का सर्वोत्तम समय
राधानगरी / दाजीपुर अभयारण्य घूमने के लिए नवंबर से जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
इस अवधि में मौसम साफ रहता है और वन्यजीवों के दर्शन की संभावना अधिक होती है
🌳 समापन
दाजीपुर–राधानगरी क्षेत्र प्रकृति, वन्यजीव, सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक स्थलों से भरपूर है। हर स्थान का अपना एक अलग महत्व और आकर्षण है।
प्रकृति प्रेमी, ट्रेकर्स, शोधकर्ता या इतिहास में रुचि रखने वाले सभी लोगों को यह क्षेत्र एक बार अवश्य देखना चाहिए।















