वासोटा किला (व्याघ्रगड)
Vasota Fort information in Hindi
• स्थान :
भारत देश के पश्चिमी भाग में स्थित सह्याद्री पर्वत की पर्वतरांगेत स्थित ऊँचा, दुर्गम और घने जंगल से घिरा हुआ गिरिदुर्ग अर्थात वासोटा किला है।
सातारा जिले के सह्याद्री पर्वत के महाबळेश्वर–कोयना पर्वतरांगेत, कोयना नदी पर हेळवाक यहाँ बने बांध के शिवसागर बैकवॉटर क्षेत्र में वासोटा किला स्थित है।
वासोटा किले की ऊँचाई :
• वासोटा किले की औसत ऊँचाई 4267 फीट / 1171 मीटर है।
• किले का ऊपरी भाग अंडाकार है और लगभग छह एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
• वासोटा किल्यावर जाने के लिए मार्ग :
वासोटा किले तक पहुँचने के दो मार्ग हैं—
1) कोकण की दिशा से —
• चिपळूण – चोरवणे गाँव तक महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बस सुविधा उपलब्ध है।
• वहाँ से नागेश्वर सुळका और आगे वासोटा किला।
2) सातारा शहर से —
• कास पठार – बामणोली गाँव – यहाँ से शिवसागर जलाशय में फॉरेस्ट विभाग की अनुमति लेकर लाँच द्वारा पली तरफ जाकर,
• मेट इंदवली गाँव के अवशेषों के पास उतरना।
• वहाँ से जंगल मार्ग → ओढा पार करना → कारवी का जंगल → पायरी मार्ग → भग्न महादरवाजा → किला।
• वासोटा किले पर देखने योग्य स्थल :
कास पठार – बामणोली
कास पठार का सुंदर नजारा देखते हुए कोयना घाटी में बसे बामणोली गाँव तक पहुँचता है।
यहाँ से नाव द्वारा वासोटा किले के पायथ्य के घने जंगल तक जाया जाता है।
फॉरेस्ट परमिट आवश्यक है।
पानी के पली तरफ पहुँचने पर ‘मेट इंदवली’ गाँव के पुराने घरों के अवशेष दिखाई देते हैं।
• घना जंगल एवं वन्यजीव
इसके बाद का जंगल अत्यंत घना एवं खतरनाक है।
यहाँ रानगवे, भालू, बाघ तथा अन्य जंगली प्राणियों की उपस्थिती अधिक है।
अतः समूह में यात्रा करना आवश्यक है।
• ओढा व पुराना मंदिर
जंगल मार्ग में आगे एक बड़ा ओढा मिलता है।
इसके किनारे भग्न स्थिति में एक मंदिर है—जहाँ हनुमान व गणेश की मूर्ति है।
यह यात्रियों को भयमुक्त और उत्साह से भर देती है।
• कारवी का जंगल – पायरी मार्ग
कारवी का घना जंगल पार करने पर पायरी मार्ग द्वारा किले के भग्न महादरवाजे तक पोहोचता है।
• वासोटा किला प्रवेशद्वार (महाद्वार)
ऊपर चढ़ने पर एक टूटा–फूटा परंतु भव्य दरवाजा दिखाई देता है।
पहले यहाँ दो दरवाजे थे।
दरवाजे के अडणा–अडकवायचा दगड (कुंडी के छेद) आज भी दिखाई देते हैं।
अंदर पहारेदारों के लिए देवडियाँ बनी हैं।
• हनुमान मंदिर :
मुख्य द्वार के अंदर एक भग्न मंदिर है।
अंदर हनुमान की मूर्ति है—युद्ध से पहले मावळे यहाँ आशीर्वाद लेते थे।
• तळी / जलकुंड
हनुमान मंदिर के पास एक जलकुंड है—गड़वासियों के उपयोग का।
• चुन्याचा घाना (चूना पीसने की घानी)
दक्षिण दिशा की ओर एक गोलाकार रिंगण जैसी रचना और बड़ा दगड़ी चाक दिखाई देता है—
यह चूना तैयार करने की पुरानी व्यवस्था है।
• तटबंदी, प्राकृतिक सौंदर्य
दक्षिण दिशा की तटबंदी से कोयना अभयारण्य, कोयना जलाशय तथा गहरी दरी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
• पाण्याचे टाके / जलकुंड
किले पर एक दो भागों में विभाजित जलकुंड है—एक भाग उथला व दूसरा गहरा।
• नागेश्वर सुळका :
कोकण कडे से दो ऊँचे सुळके (पहाड़ी स्तंभ) दिखते हैं—
उनमें से एक नागेश्वर सुळका है।
इसके पायथ्य वनमार्ग से जाते हैं।
यहाँ एक गुफा है जिसमें स्वयंभू शिवलिंग तथा वर्षभर टपकता पानी दिखाई देता है।
महा–शिवरात्रि के समय यहाँ हजारों भक्त आते हैं।
इसके बाजू का दूसरा सुळका तुळशी वृंदावन / ठेंगा कहलाता है।
ये दोनों अत्यंत कठिन चढ़ाई वाले शिखर हैं।
• महादेव मंदिर :
नागेश्वर सुळका के दर्शन के बाद शिलाहार कालीन पाषाण मंदिर मिलता है—
सुंदर कलशयुक्त यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है।
• जुना तुरुंग अवशेष :
आगे एक खंडहर दिखाई देता है—मध्ययुग में यहाँ कैदी रखे जाते थे।
• सदर / वाडा अवशेष :
चौथरा व आधारभूत संरचना वाले अवशेष मिलते हैं—यह पुराना सदर–वाडा है।
• दक्षिण टोक व जुना वासोटा डोंगर :
दक्षिण दिशा में अत्यंत उंचा वासोटा पर्वत दिखाई देता है।
नीचे गहरी दरी और घनदाट जंगल—दृश्य अत्यंत रमणीय है।
इसे जुना वासोटा कहा जाता है।
• कोकण कडा / बाबू कडा :
वासोटा का पश्चिमी भाग खड़ी, ऊँची, खतरनाक दरी पर समाप्त होता है।
इसी कड्याला कोकण कडा या बाबू कडा कहा जाता है।
• वासोटा किले का इतिहास :
• प्राचीन काल में महर्षि वशिष्ठ के एक शिष्य यहाँ रहते थे—इसलिए स्थान को वशिष्ठ → वासोटा नाम प्राप्त हुआ।
• "वसने" (रहना) → "वास" → वासोटा (ज्ञानेश्वरी प्रमाण)।
• 11वीं सदी : शिलाहार राजा भोज ने किला बनाया।
• बाद में बहामनी राज्य में।
• फिर आदिलशाही में।
• जावळी के मोरे सरदारों के नियंत्रण में।
• 1660 : छत्रपती शिवाजी महाराज ने जावळी मोहीम के वेळी वासोटा किला जिंक लिया।
• अफजलखान प्रकरणानंतर राजापुर येथील इंग्रज अधिकारी ‘गिल्फर्ड’ यास येथे कैद में रखा गया।
• 1661 : कोकण में आतंक मचाने वाले अरबी चाचों स्यामुअल व फ्यारन को शिवाजी महाराजांनी पकडकर वासोटा में कैद रखा।
• 1661 : किले पर 26,000 रुपये मिले।
• पेशवाईकालात—औंधचे पंतप्रतिनिधी यांच्या ताब्यात।
• 1706 : ताई तेलनी के ताब्यात।
• 1730 : पेशवे बाजीराव द्वितीय के सेनापती बापू गोखले ने ताई तेलनी पर आक्रमण किया।
ताई तेलनी ने 7–8 महीने तक प्रचंड प्रतिकार किया।
प्रसिद्ध पद्य—
“श्रीमंत पंतप्रतिनिधी यांचा अजिंक्य वासोटा, ताई तेलिन मारी सोटा, सांभाल बापू गोखल्या तुझा कासोटा.”
• 1818 : इंग्रजांचा ताबा।
अशी आहे वासोटा किल्याची ऐतिहासिक माहिती.
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