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गुरुवार, १३ नोव्हेंबर, २०२५

रामशेज किले की जानकारी Ramshej Fort information in Hindi


🌄 रामशेज किले की जानकारी

Ramshej Fort information in Hindi

रामशेज किले की जानकारी  Ramshej Fort information in Hindi


📍 स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के नाशिक शहर से उत्तर दिशा में लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सपाट प्रदेश पर ऊँचाई पर बना हुआ गिरिदुर्ग ही रामशेज किला है।

यह किला हिंदू देवता त्रेतायुग के अवतार पुरुष भगवान श्रीरामचंद्रजी के निवास से पवित्र हुआ है।

🌿 नाम की उत्पत्ति :

जब भगवान श्रीराम वनवास में नाशिक क्षेत्र में निवास कर रहे थे, तब वे इस स्थान पर विश्राम करने के लिए आते थे। “शेज” का अर्थ होता है अंथरुन (सोने का स्थान), इसलिए इस स्थान को “रामाची शेज” कहा गया और बाद में यही नाम “रामशेज” पड़ा।

रामशेज किले की जानकारी  Ramshej Fort information in Hindi


⛰️ रामशेज किले की ऊँचाई :

इस किले की ऊँचाई 3200 फीट है। यह सह्याद्री पर्वत श्रेणी का एक गिरिदुर्ग (पहाड़ी किला) है।

🛣️ रामशेज किले तक पहुँचने का मार्ग :

मुंबई – नाशिक – नाशिक पेठ मार्ग – आसेवाडी से किले तक पहुँचा जा सकता है।

नाशिक जिले के वणी-दिंडोरी से 10 मील की दूरी पर रामशेज किला स्थित है।

पुणे व मुंबई से नाशिक होकर रामशेज तक जाया जा सकता है।

पुणे – नाशिक – रामशेज दूरी लगभग 230 किलोमीटर है।

मुंबई – नाशिक – रामशेज दूरी लगभग 180 किलोमीटर है।

पंचवटी से रामशेज किला लगभग 10 किलोमीटर दूर है।

🏞️ रामशेज किले पर देखने योग्य स्थान :

नाशिक पेठ मार्ग के आसेवाडी गाँव में पहुँचने पर किले की दिशा में जाते समय एक भव्य कमान (आर्च गेट) दिखाई देता है। वहाँ से आगे गाड़ी तले तक वाहन पार्क करके पैदल चढ़ाई शुरू की जा सकती है।

🪜 पायरी मार्ग :

रामशेज किले की जानकारी  Ramshej Fort information in Hindi


सीढ़ीनुमा रास्ते और खड़ी चट्टानों के बीच की पगडंडी से लगभग पौने घंटे में किले के शिखर तक पहुँचा जा सकता है।

🕉️ रामशेज गुफा व मंदिर :

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किले पर चढ़ते समय ऊपर की ओर एक गुफा के पास स्थित सुंदर मंदिर दिखाई देता है।

यह स्थान रामशेज नाम से प्रसिद्ध है।

मान्यता है कि वनवास के समय भगवान श्रीराम यहाँ विश्राम (निद्रा) के लिए आते थे।

वहीं अब प्रभु श्रीराम का मंदिर बना है — जहाँ का शांत वातावरण मन को प्रसन्न करता है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मणजी और हनुमानजी की सुंदर मूर्तियाँ हैं।

साथ ही श्री गुरुदेव दत्त और माता दुर्गा की मूर्तियाँ भी यहाँ स्थित हैं।

मंदिर के पास एक शिलालेख (पत्थर लेख) है जिससे ज्ञात होता है कि यह मंदिर पेशवा बाळाजी बाजीराव के काल में निर्मित हुआ था।

💧 पानी के टांके (जलाशय) :

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मंदिर के समीप ही भूमिगत चट्टानों में खोदकर बनाया गया टांका (पानी का तालाब) है।

यह वर्षभर स्वच्छ पानी प्रदान करता है और वर्षा के जल से भर जाता है।

🚪 महादरवाजा :

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मंदिर के सामने कभी एक विशाल महादरवाजा (मुख्य द्वार) था, जिसके अब केवल अवशेष बचे हैं।

⛏️ खनन अवशेष व चौकी :

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महादरवाजे से अंदर जाते समय पश्चिम दिशा में एक कक्ष (कमरा) दिखाई देता है जिसमें अंदर छोटी-छोटी देवालय जैसी आकृतियाँ बनी हैं।

यहाँ निकाली गई पत्थर की चट्टानों से किले की दीवारें बनीं।

शेष स्थान का उपयोग अन्न व रसद भंडारण के लिए किया जाता था।

⚙️ चूना घानी :

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थोड़ा आगे जाने पर पत्थर से बनी चूना पिसाई की घानी दिखाई देती है, जिसका उपयोग निर्माण में होने वाले चूने के लिए किया जाता था।

🏰 नया महादरवाजा :

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घानी के पास नीचे की ओर खोदकर बनाया गया एक नया अधूरा महादरवाजा दिखाई देता है।

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यह बहुत संकरा रास्ता है, जिसे बनाते समय मुगल आक्रमण के कारण काम अधूरा रह गया।

यह किला निर्माण कला का अद्भुत उदाहरण है।

🪶 पठारी भाग :

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महादरवाजे से ऊपर जाने पर एक विस्तृत पठार दिखाई देता है।

चारों ओर ऊँची-ऊँची चट्टानें और सपाट प्रदेश इस किले की भव्यता बढ़ाते हैं।

🧱 तटबंदी :

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किले की तटबंदी के लिए ऊपर की चट्टानों से पत्थर काटे गए थे।

आज केवल कुछ अवशेष दिखाई देते हैंl

💦 जलाशय :

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जहाँ से पत्थर निकाले गए, वहाँ कई पानी की टंकियाँ (टांके) बनीं।

इनमें वर्षा का पानी जमा होता है जो सालभर किलेवासियों की प्यास बुझाता था।

🕳️ चोर दरवाजा :

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उत्तर-पश्चिम दिशा में एक भूमिगत चोर दरवाजा है।

इसका उपयोग संकट के समय बाहर निकलने, संदेश पहुँचाने या रसद लाने के लिए होता था।

🛕 भवानी माता मंदिर :

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किले के ऊपर पठार पर स्थित माता भवानी का छोटा मंदिर है।

मंदिर के बाहर त्रिशूल और अंदर देवी की मूर्ति है।

🧱 दुहरी तटबंदी :

किले पर कुछ स्थानों पर दोहरी दीवारें (दुहेरी तटबंदी) हैं, जो किले को और अधिक मजबूत बनाती थीं।

🏯 बुरुज :

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किले पर रक्षा हेतु कई बुरुज (मीनारें) बनाई गई थीं, जिनके अब केवल अवशेष बचे हैं।

🪖 चौकियाँ :

विभिन्न दिशाओं में बनी चौकियों पर पहरेदार तैनात रहते थे।

यही किले में प्रवेश की जाँच करते थे।

🏠 किल्लेदार वाडा :

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किले के ऊपरी भाग में किल्लेदार के निवास वाडे के अवशेष हैं।

साथ ही शिबंदी सैनिकों के आवास भी दिखते हैं।

🔭 टेहलनी बुरुज :

किले पर चारों दिशाओं की निगरानी के लिए टेहलनी बुरुज (वॉच टॉवर) बने थे, जिनसे आस-पास का पूरा क्षेत्र दिखाई देता है।

🚩 ध्वजस्तंभ :

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दक्षिण-पश्चिम दिशा के पठारी भाग में एक ध्वजस्तंभ है जो आज भी हिंदवी स्वराज्य का प्रतीक बनकर खड़ा है।

🕉️ शिव गुहा मंदिर :

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किले के पहाड़ी भाग में एक शिव गुफा है, जहाँ वर्षा के दिनों में गुफा की छत से पानी टपककर शिवलिंग पर गिरता है — यह एक प्राकृतिक चमत्कार माना जाता है।

🔭 बालेकिल्ला दृश्य :

ऊपरी भाग से देखने पर सातमाळा पर्वतरांग, त्र्यंबक डोंगररांग, भोरगड, रोहिडगड आदि पर्वतों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

📜 रामशेज किले का ऐतिहासिक महत्व :

त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने यहाँ निवास किया था।

किला सबसे पहले किसने बनवाया, इस पर स्पष्ट जानकारी नहीं है।

लेकिन सातवाहन, वाकाटक, चालुक्य और यादव जैसी हिंदू राजवंशों का इस क्षेत्र पर शासन रहा।

बाद में बहमनी और निजामशाही शासन के अधीन आया।

शिवाजी महाराज के काल में यह किला स्वराज्य में शामिल हुआ।

छत्रपति संभाजी महाराज के समय इस किले ने अद्भुत पराक्रम दिखाया।

⚔️ मुघल आक्रमण :

सन् 1682 में औरंगजेब ने दक्षिण में प्रवेश किया और अपने सरदार शहाबुद्दीन खान को 4 लाख सैनिकों के साथ रामशेज किला जीतने भेजा।

किले पर केवल 600 मराठा मावळे थे, लेकिन उन्होंने शौर्य से लड़ाई लड़ी।

दगड़-पत्थरों से हमला, रात में छापेमारी और रसद लूटकर मराठों ने मुघलों को कमजोर किया।

औरंगजेब के आदेश पर शहाबुद्दीन ने किले के पास दमदमा (तोप मंच) बनाया, पर मराठों ने रात में उसे जला दिया।

🏹 फत्तेखान की पराजय :

फिर फत्तेखान को भेजा गया। उसने 20,000 सैनिकों के साथ हमला किया।

लेकिन मराठों की गोफण और दगड़बाजी से मुघल सेना तबाह हुई।

किले के बुरुज पर तोप के गोले गिरते, मराठे रातभर में उन्हें फिर से बना देते।

फत्तेखान ने समझा कि मराठे जादू-टोना करते हैं, और उसने एक तांत्रिक बुलवाया।

परंतु गोफण का पत्थर तांत्रिक के सीने पर लगा और वह वहीं मारा गया।

फत्तेखान भयभीत होकर भागा।

🪖 तीसरा प्रयास — कासिम खान :

फिर कासिम खान को भेजा गया, जिसने किले की नाकाबंदी कर दी।

रसद खत्म होने पर संभाजी महाराज ने रुपाजी भोसले और मानाजी मोरे को रसद पहुँचाने भेजा।

बारिश के दौरान उन्होंने सफलतापूर्वक रसद पहुँचा दी और मराठों ने फिर से युद्ध जारी रखा।

कासिम खान भी किला जीत न सका।

🛡️ किल्लेदार :

इतिहासकारों में मतभेद हैं — कुछ सूर्याजी जेधे, कुछ गोविंद गायकवाड़, और कुछ रंभाजी पवार को किल्लेदार मानते हैं।

यह किला लगातार 6 वर्षों तक अजिंक्य (अजेय) रहा।

संभाजी महाराज ने किल्लेदार का रत्नजड़ित कड़े व धन देकर सत्कार किया।

🏰 औरंगजेब का नामकरण :

बाद में रसद समाप्त होने पर नए किल्लेदार ने मुघलों से समझौता कर किला सौंप दिया।

औरंगजेब ने किले की मरम्मत की, दारूगोला व रसद भरी, और नाम रखा — रहीमगढ।

पर जल्द ही 300 मराठा मावळों ने हमला कर किला पुनः जीत लिया।

यह किला ब्रिटिश शासन तक स्वराज्य में रहा और बाद में अंग्रेजों के अधीन चला गया।

🇮🇳 वर्तमान स्थिति :

आज रामशेज किला भारत सरकार के अधीन संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है।

✨ यही है भव्य और गौरवशाली रामशेज किले की पूरी जानकारी

Ramshej Fort information in Hindi


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