🌳 नवेगांव–नागझिरा वन्य अभयारण्य | संपूर्ण जानकारी
📍 1. नवेगांव–नागझिरा वन्य अभयारण्य का स्थान
नवेगांव–नागझिरा वन्य अभयारण्य महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित है। यह गोंदिया और भंडारा जिलों की सीमा पर, गोंदिया जिले के अर्जुनी मोरगांव तहसील में फैला हुआ है। पेंच, ताडोबा और कान्हा जैसे प्रमुख टाइगर रिज़र्व के बीच स्थित होने के कारण इसे संक्रमण क्षेत्र (कॉरिडोर सैंक्चुरी) कहा जाता है, जो बाघों के सुरक्षित आवागमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
📐 2. क्षेत्रफल एवं भौगोलिक संरचना
इस अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल लगभग 653.67 वर्ग किलोमीटर है। इसका अधिकांश भाग पहाड़ी और घने जंगलों से आच्छादित है। पहाड़ियों के पाददेश में इटीयाडोह बांध, नवेगांव बांध और नवेगांव झील स्थित हैं। माधवझरी, राणी डोह, कामझरी, टेलनझरी, अंगेझरी और श्रृंगारबोड़ी जैसे कई प्राकृतिक जलस्रोत और दलदली क्षेत्र यहां पाए जाते हैं। क्षेत्रफल के आधार पर यह भारत में 46वें और महाराष्ट्र में 5वें स्थान पर है।
🗂️ 3. अभयारण्य के प्रमुख वन विभाग
नवेगांव–नागझिरा अभयारण्य को पांच प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है—नागझिरा (155 वर्ग किमी), नवीन नवेगांव (151 वर्ग किमी), नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान (133 वर्ग किमी), नवेगांव अभयारण्य (123 वर्ग किमी) और पोका क्षेत्र (97 वर्ग किमी)। यह विभाजन वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।
💧 4. नवेगांव बांध एवं जल प्रबंधन
नवेगांव बांध इस अभयारण्य का मुख्य जलस्रोत है, जिसका निर्माण गोंड आदिवासी राजा सीताराम कोंडू पाटील डोंगरबा द्वारा किया गया था। झील के मध्य भाग में उनकी समाधि स्थित है। इस बांध से आसपास के पांच गांवों को निःशुल्क जलापूर्ति होती है, जबकि 15 से 20 गांवों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलती है।
🌿 5. वनस्पति एवं वन संरचना
यह क्षेत्र उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों में आता है। यहां सागौन, बांस, ऐन, धावड़ा, तेंदू, मोह, हल्दू, कवठ, जामुन, बेल, महुआ, आम और शीशम जैसे वृक्ष पाए जाते हैं। अभयारण्य में महर्षि चरक के नाम पर ‘चरक उद्यान’ विकसित किया गया है, जहां औषधीय और आयुर्वेदिक पौधों का संरक्षण किया जाता है। यहां सुगंधित वृक्ष और जंगली फल देने वाली झाड़ियां भी पाई जाती हैं, जिनमें ‘आमरस’ नामक दुर्लभ फल विशेष उल्लेखनीय है।
🌊 6. जल वनस्पतियां एवं वनीकरण कार्य
नवेगांव झील और अन्य जलाशयों में कमल, शैवाल और जलपर्णी ‘इकोर्निया’ (स्थानीय नाम – बेशरम) जैसी जल वनस्पतियां पाई जाती हैं। इन निरुपयोगी वनस्पतियों का उन्मूलन कर नए वनीकरण और पारिस्थितिकी संतुलन के कार्य किए जा रहे हैं।
🐯 7. प्रमुख वन्यजीव – बंगाल टाइगर
नवेगांव–नागझिरा अभयारण्य का मुख्य आकर्षण बंगाल टाइगर है। यहां बाघों की नियमित गणना सेंसर और कैमरा ट्रैप के माध्यम से की जाती है। एक नर बाघ लगभग 45 वर्ग किलोमीटर और एक मादा बाघिन लगभग 12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विचरण करती है। पंजों के निशान और शरीर की धारियों से प्रत्येक बाघ की पहचान की जाती है।
🐆 8. अन्य स्तनधारी प्राणी
इस अभयारण्य में तेंदुआ, जंगली बिल्ली, ढोले (जंगली कुत्ते), गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर, भालू, बंदर और लंगूर सहित 34 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसकी समृद्ध जैवविविधता को दर्शाती हैं।
🐦 9. पक्षी जीवन एवं पक्षी निरीक्षण
यह अभयारण्य पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है। यहां 209 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें एशिया के लगभग 60% प्रवासी पक्षी शामिल हैं। गरुड़, गिद्ध, हॉर्नबिल, मोर, क्रौंच, हंस, सारस, बगुला, किंगफिशर और जलकुक्कुट प्रमुख पक्षी हैं।
🐍 10. सरीसृप, उभयचर एवं कीट जीवन
यहां 36 से अधिक सरीसृप प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें विभिन्न सांप और घोरपड़ शामिल हैं। इसके अलावा मेंढक, केकड़े जैसे उभयचर और 120 से अधिक तितली प्रजातियां भी इस अभयारण्य में पाई जाती हैं।
🚗 11. नवेगांव–नागझिरा कैसे पहुंचें
निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नागपुर है। रेल मार्ग से साकोली और गोंदिया स्टेशन से सड़क द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है। अभयारण्य में कुल 10 प्रवेश द्वार हैं और पर्यटकों के लिए जिप्सी व कैंटर सफारी की सुविधा उपलब्ध है।
⚠️ 12. पर्यटकों के लिए नियम एवं सुरक्षा निर्देश
अभयारण्य में धूम्रपान, मद्यपान, प्लास्टिक और कचरा ले जाना सख्त वर्जित है। वन्यजीवों को छेड़ना या तेज आवाज करना मना है। फोटोग्राफी की अनुमति है, लेकिन फ्लैश का उपयोग निषिद्ध है।
👥 13. आदिवासी समुदाय एवं स्थानीय रोजगार
अभयारण्य की सीमा पर गोंड आदिवासी गांव स्थित हैं। वन विभाग द्वारा सौर ऊर्जा आधारित सौम्य करंट फेंसिंग की व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों को गाइड, ड्राइवर, वॉचमैन और वनोपज संग्रह जैसे कार्यों से रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
📅 14. भ्रमण का सर्वोत्तम समय
नवेगांव–नागझिरा भ्रमण के लिए अक्टूबर से जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यहां रॉक गार्डन, सजावटी पौधे, बच्चों के खेल क्षेत्र और भित्ति चित्र पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
🏨 15. ठहरने की सुविधा
पर्यटकों के लिए पीठेझरी, नागझरी और उमरझरी में सरकारी निवास व्यवस्था उपलब्ध है। इसके अलावा आसपास निजी लॉज और भोजनालय भी मौजूद हैं।
🏛️ 16. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह क्षेत्र प्राचीन काल में गोंड राजाओं के अधीन था। 18वीं शताब्दी में नवेगांव झील का निर्माण हुआ। 22 नवंबर 1974 को इसे अभयारण्य घोषित किया गया और 2012 में नवेगांव–नागझिरा को राष्ट्रीय व्याघ्र परियोजना का दर्जा मिला। वर्तमान में यहां प्रतिवर्ष 40,000 से अधिक पर्यटक आते हैं।









