अजंता गुफाओं की जानकारी
Ajanta Caves Information in Hindi
• भारत देश की समृद्ध प्राचीन सांस्कृतिक विरासत में अजंता गुफाओं का महत्वपूर्ण स्थान है।
• स्थान :
भारत देश के मध्यवर्ती भाग में स्थित महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद शहर से लगभग 100 से 110 कि.मी. की दूरी पर अजंता गुफाएं वाघूर नदी के तट पर, पहाड़ में काले बेसाल्ट नामक आग्नेय चट्टान को काटकर बनाई गई हैं।
• अजंता गुफाओं तक जाने का यात्री मार्ग :
भारत के अन्य शहरों तथा क्षेत्रों से सड़क मार्ग, रेल मार्ग और हवाई मार्ग द्वारा औरंगाबाद (संभाजीनगर) शहर जुड़ा हुआ है।
औरंगाबाद शहर से अजंता गुफाएं लगभग 100 से 110 कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं। गुफाओं से कुछ दूरी पर वाहन पार्किंग की सुविधा है। यहां से सरकारी बस द्वारा मुख्य गुफाओं तक पहुंचा जा सकता है।
• अजंता गुफाओं के विषय में जानकारी :
अजंता गुफाएं वाघूर नदी के किनारे स्थित पहाड़ में, घोड़े के खुर में पहनाई जाने वाली नाल के आकार में तराशी गई हैं। यह पूरा पहाड़ काले-भूरे बेसाल्ट पत्थर का कठोर आग्नेय चट्टान है।
ये गुफाएं नदी के तल से लगभग 15 से 30 मीटर (40 से 100 फीट) की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां पहुंचने के लिए एक मार्ग बनाया गया है। रास्ते में छोटे-छोटे दुकानों में विभिन्न शिल्प रचनाओं वाली मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं।
इस स्थान पर कुल 29 बौद्ध गुफाएं देखने को मिलती हैं, जिनमें से कुछ गुफाएं अधूरी हैं।
• पहली बौद्ध गुफा :
गुफाओं की ओर जाने वाले मार्ग से सबसे पहले हम पहली गुफा के निकट पहुँचते हैं। यह गुफा बीस स्तंभों वाली, सुंदर और सुबक कलाकारी से युक्त है। इसके भीतर सुंदर चित्रांकन किया गया है। स्तंभों के ऊपरी भाग पर नाजुक नक्काशी देखने को मिलती है। अंदर की ओर तथागत गौतम बुद्ध की सुंदर मूर्ति देखने को मिलती है।
2) दूसरी क्रमांक की गुफा में प्रवेश करने पर छत और दीवारों पर की गई नाजुक कलाकारी दिखाई देती है। साथ ही दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन की घटनाओं पर आधारित अनेक भित्ति चित्र बने हुए हैं। इन भित्ति चित्रों के रंग आज भी नए जैसे प्रतीत होते हैं। मध्य भाग में स्थित सुंदर बुद्ध प्रतिमा मन को आकर्षित करती है। इस गुफा के एक ओर पंचिका और हराती की शिल्पाकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं। यहाँ के स्तंभों पर भी बारीक नक्काशी स्पष्ट दिखाई देती है।
• तीसरे कक्ष की गुफाएँ अपूर्ण अवस्था में हैं।
• चौथी क्रमांक की गुफा एक विस्तृत सभागृह वाली है। यहाँ कुल अट्ठाईस स्तंभ हैं। बाहरी भाग में द्वारपालों की मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं। पूजा स्थल पर महात्मा गौतम बुद्ध की मूर्ति स्थित है। इस प्रकार यहाँ कुल छह बुद्ध मूर्तियाँ दिखाई देती हैं। उनके मुखमंडल के भाव देखने पर यह गुफा अष्ट भय निवारक प्रतीत होती है। यह गुफा विशाल स्वरूप की है।
• पाँचवीं क्रमांक की गुफा अपूर्ण है। यहाँ अपूर्ण बुद्ध मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं।
• गुफा क्रमांक 6 दो मंजिला गुफा है। यहाँ स्थित बुद्ध मूर्ति पद्मासन में विराजमान दिखाई देती है। दूसरी मंजिल पर स्तंभ हैं। सभागृह के स्तंभों पर तथा अन्य स्थानों पर मगरों और पुष्पों की नक्काशी की गई है। दूसरी मंजिल पर गौतम बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं। इस गुफा के द्वार पर भी सुंदर नक्काशी दिखाई देती है।
• आठवीं गुफा में देखने योग्य विशेष कुछ नहीं है।
• नौवीं गुफा का आकार आयताकार चैत्यगृह का है। मध्य भाग में स्तूप है तथा किनारे के स्तंभों पर अस्पष्ट बुद्ध मूर्तियाँ विभिन्न भावमुद्राओं में अंकित दिखाई देती हैं।
• दसवीं गुफा एक हीनयान बौद्ध पंथ से संबंधित गुफा है। इस गुफा में चालीस स्तंभ हैं और मध्य भाग में चैत्यगृह स्थित है। यहाँ की कोरीव कला अत्यंत मनोहर है।
• ग्यारहवीं गुफा एक विशाल सभामंडप है, जिसमें पूजा स्थल पर बुद्ध मूर्ति स्थापित है।
• सोलहवीं गुफा अत्यंत विशेष महत्त्व की है। इसमें बुद्ध के चित्र बने हुए हैं। बुद्ध के जीवन से जुड़े विविध प्रसंग और घटनाएँ यहाँ चित्रित की गई हैं।
• सत्रहवीं क्रमांक की गुफाओं में सुंदर भित्ति चित्र देखने को मिलते हैं। इनमें बुद्ध जातक कथाएँ अंकित हैं, जो जीवन जीने का तात्विक और अनमोल संदेश देती हैं। मध्य भाग में बुद्ध मूर्ति स्थित है।
उन्नीस क्रमांक की गुफा एक नाले के आकार का मंदिर है। इसमें भी बुद्ध मूर्ति देखने को मिलती है। साथ ही नागराजा और उनकी पत्नी की शिल्पाकृति भी देखी जा सकती है। यहाँ तीन छत्री स्तूप है। इसके अलावा अनेक बुद्ध मूर्तियाँ उत्कीर्ण की हुई दिखाई देती हैं।
• गुफा क्रमांक 26 अजंता गुफाओं की शिल्पकला का वैभव दर्शाने वाली गुफा है। सुंदर नक्काशीदार तोरण (कमान), भीतर बुद्ध का महापरिनिर्वाण शिल्प, तथा दोनों ओर बुद्ध जीवन की घटनाओं को दर्शाने वाली शिल्पकृतियाँ देखने को मिलती हैं। साथ ही अन्य दीवारों पर चित्रों के माध्यम से बुद्ध चरित्र तथा जातक कथाएँ दिखाई देती हैं।
• अन्य कई गुफाएँ अधूरी हैं।
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• अजंता गुफाओं की ऐतिहासिक जानकारी :
• अजंता गुफाएँ देखने पर विभिन्न कालों की शैलियाँ देखने को मिलती हैं।
• इन गुफाओं का निर्माण दो चरणों में किया गया।
• दूसरा से चौथा शताब्दी के दौरान निर्मित गुफाएँ, जिनमें स्तूप रचना दिखाई देती है। ये बौद्ध धर्म के हीनयान पंथ के काल की हैं।
• दूसरा चरण छठी से नौवीं शताब्दी के बीच निर्मित महायान गुफाओं का है। ये गुफाएँ वाकाटक राजवंश के काल में खोदी गई थीं। वाकाटक राजवंश के पतन के बाद इन गुफाओं का कार्य रुक गया, इसलिए यहाँ की कई गुफाएँ अधूरी रह गईं।
• ये गुफाएँ वाघूर नदी के तट पर जंगल से घिरी होने के कारण शत्रु राजवंशों के समय सुरक्षित रहीं।
• ईस्वी सन 28 अप्रैल 1839 को ब्रिटिश शासन काल में मद्रास प्रांत के अधिकारी जॉन स्मिथ इस स्थान पर आए थे। शिकार के लिए जाते समय उन्हें ये गुफाएँ पहली बार दिखाई दीं।
• ईस्वी सन 1983 में यूनेस्को संस्था ने इन गुफाओं को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी।
• महाराष्ट्र राज्य के सात आश्चर्यों में इन गुफाओं का प्रथम स्थान है।
• चीनी और बौद्ध यात्रियों के वर्णन ग्रंथों में इन गुफाओं का उल्लेख मिलता है।
• इन गुफाओं में बौद्ध धर्म से संबंधित मूर्तियाँ, शिल्प और चित्र शामिल हैं। चित्र बनाने के लिए प्राकृतिक साधनों का उपयोग किया गया है, जैसे प्राकृतिक रंग, मिट्टी, चावल का कोंडा तथा अन्य प्राकृतिक घटक।
• इस प्रकार अजंता गुफाओं की यह जानकारी है।
Ajanta Caves Information in Hindi







































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