कार्ला लेणी व देवी एकविरा मंदिर माहिती
Karla Leni and Ekvira Devi Temple Information in Hindi
एकविरा देवी
स्थान :
महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले के मावल तालुका में बोरघाट क्षेत्र, सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में ये लेणियाँ खोदी और तराशी गई हैं।
• नालासोपारा से कल्याण होते हुए बोरघाट और अन्य घाट मार्गों से प्राचीन काल में तेर, भोकरदन जैसे शहरों के साथ व्यापार चलता था।
कार्ला लेणी देखने जाने का यात्रा मार्ग :
• पुणे और मुंबई भारत के बड़े शहर हैं और ये कार्ला के काफ़ी नज़दीक स्थित हैं।
• पुणे–मुंबई बस से कार्ला फाटा पर उतरकर कार्ला लेणी देखने जाया जा सकता है।
• पुणे–लोणावळा लोकल ट्रेन से मालवली स्टेशन पर उतरकर, वहाँ से रिक्शा या अन्य वाहन द्वारा हाईवे के पास स्थित कमानी से होते हुए कार्ला डोंगर के पायथा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।
• भ्रमंतीवेळी अनेक वस्तू लागतात. त्या तुम्ही खालील वेबसाईटच्या आधारे पाहू शकता. खरेदी करू शकता.
• ट्रॅव्हल श्याक /Tripole Aur Trekking and Travel Rucksack
👉https://amzn.to/4rDgX2V
• ट्रेकिंग शूज/ Trekking shoes / Hiking shoes
👉 https://amzn.to/4uyIUeZ
• टोपी / Sun Cap / hat :
👉 https://amzn.to/4bRniDe
• कॅमेरा / Action Camera :
👉 https://amzn.to/4biTU90
• सेल्फी स्टिक/ Selfie stick. :
👉 https://amzn.to/4bGETNg
• बॅटरी/ LED Headlamp / Torch :
👉https://amzn.to/4bNNUoN
• रोहन दोरी /Climbing rope :
👉https://amzn.to/41bmO4P
• कॅरेबिनर हुक/ Carabiner Hooks :
👉 https://amzn.to/4uDMC7i
• फर्स्ट अँड कीट /First Aid kit :
👉https://amzn.to/4bx27VF
• कॅम्पिंग टेन्ट /Camping Tent :
👉https://amzn.to/47bm973
• झोपण्याची बॅग / Sleeping Bag :
👉 https://amzn.to/40IDYqn
• दुर्बीण /Telescope
👉 https://amzn.to/4snpwQS
कार्ला परिसर के दर्शनीय स्थल :
• कार्ला पहाड़ी के नीचे पायथ्ये पर वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। वहाँ वाहन पार्क कर सीधे पायथा मंदिर तक जाया जा सकता है।
एकविरा देवी पायथा मंदिर :
• मान्यता है कि भक्तों के दर्शन हेतु देवी स्वयं डोंगर के पायथ्ये तक आई थीं, इसलिए यहाँ पायथा मंदिर का निर्माण किया गया है।
• इस स्थान पर चरण पादुका और देवी की सुंदर मूर्ति देखने को मिलती है।
• अनेक भक्त यहाँ दर्शन कर आगे की यात्रा प्रारंभ करते हैं।
मंदिर के पीछे का सीढ़ी मार्ग :
• पायथा मंदिर के पीछे से सीढ़ियों का मार्ग शुरू होता है।
• कई भक्त “आई एकविरा का उदो उदो उदो” कहते हुए पहली सीढ़ी पर नमन कर इस मार्ग से आगे बढ़ते हैं।
• यह मार्ग चलने में सुगम है, परंतु थोड़ा कष्टदायक भी है।
सीढ़ी मार्ग और दुकानें :
• एकविरा देवी हिंदू धर्म का एक पवित्र तीर्थस्थान है।
• दर्शन के लिए आने-जाने वाले भक्त यहाँ खरीदारी करते हैं।
• इसी कारण इस मार्ग पर अनेक दुकानें देखने को मिलती हैं।
झरना (धबधबा) :
• सीढ़ी मार्ग से आगे बढ़ने पर रास्ते में एक छोटा झरना मिलता है।
• वर्षा ऋतु में यह झरना भरपूर बहता है, जबकि गर्मियों में इसका पानी कम हो जाता है।
• गर्मियों में इस झरने का मीठा और शुद्ध पानी पीने में स्वादिष्ट लगता है।
• एकविरा देवी पादुका मंदिर:
थोड़ा आगे जाने पर चट्टान पर स्थित एक मंदिर दिखाई देता है। यहाँ की चट्टान में देवी के पैरों के चिन्ह अंकित हैं। उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया गया है।
इस परिसर में वाहन पार्किंग मार्ग और सीढ़ी मार्ग एक साथ मिलते हैं।
• खड़ी चढ़ाई वाला सीढ़ी मार्ग:
देवी के चरण पादुका मंदिर से वास्तविक चढ़ाई शुरू होती है। यह मार्ग अत्यंत थकाने वाला है।
• विस्तृत प्रांगण और पूजा सामग्री स्टॉल:
ऊपर चढ़ने के बाद एक विशाल प्रांगण मिलता है। इस स्थान पर देवी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा सामग्री खरीदने के स्टॉल लगे हुए हैं। यहाँ से पूजा सामग्री खरीदकर भक्त आगे दर्शन के लिए जाते हैं।
• टिकट घर:
इस स्थान से टिकट लेकर आगे दर्शन के लिए जाया जा सकता है। प्रति व्यक्ति 25 रुपये शुल्क लिया जाता है।
• नगाड़ा खाना:
पूजा सामग्री लेकर आगे बढ़ने पर नगाड़ा खाना दिखाई देता है, जहाँ देवी के लिए नगाड़ा बजाया जाता है।
• कपूर स्तंभ:
देवी मंदिर परिसर में एक छोटा स्तंभ दिखाई देता है, जिसका उपयोग कपूर जलाने के लिए किया जाता है।
• बाबाजी महाराज समाधि:
मंदिर प्रांगण में एक समाधि दिखाई देती है, जो बाबाजी महाराज की है।
• सभा मंडप:
आगे डोंगर की चट्टान से सटा हुआ मंदिर दिखाई देता है। इसके आगे दर्शन मंडप और उसके आगे गर्भगृह स्थित है। देवी के उत्सव के समय इस स्थान पर अत्यधिक भीड़ रहती है।
• गर्भगृह:
गर्भगृह में एक सुंदर चौखट लगाई गई है। उसके भीतर प्रवेश करने पर काले काताल पत्थर में उकेरी गई अत्यंत सुंदर एकविरा देवी की मूर्ति दिखाई देती है। देवी के सिर पर स्वर्ण मुकुट, ललाट पर कुंकुम और सौभाग्य के आभूषण धारण किए हुए यह मूर्ति दर्शन मात्र से नेत्रों को तृप्त कर देती है।
यह देवी जलदेवता स्वरूप मानी जाती हैं। आगरी-कोली समुदाय इस देवी के प्रमुख भक्त हैं। साथ ही चंद्रसेनी कायस्थ प्रभु, कुणबी और देवज्ञ ब्राह्मण समाज की भी कुलदेवता एकविरा देवी हैं। संकटों को दूर करने वाली तारणहार देवी के रूप में इनकी मान्यता है।
• जोगेश्वरी माता की मूर्ति:
एकविरा देवी के भाई कालभैरव की पत्नी जोगेश्वरी माता की मूर्ति देवी के समीप स्थित है। एकविरा और जोगेश्वरी का संबंध ननद–भावजयी का है।
• पौराणिक कथा एवं मान्यता:
एकविरा देवी की इच्छा थी कि उनका मंदिर एक ही रात में निर्मित हो। वनवास के समय पाँचों पांडवों ने इस स्थान पर एकविरा देवी की उपासना की। उन्होंने पर्वत को खोदकर गर्भगृह बनाया और एक ही रात में देवी की मूर्ति का निर्माण कर प्राणप्रतिष्ठा की।
तब देवी एकविरा ने उन्हें यह आशीर्वाद दिया कि अज्ञातवास के दौरान कोई भी उन्हें पहचान नहीं सकेगा। इसके पश्चात देवी इस स्थान पर स्थायी रूप से निवास करने लगीं।
भगवान शंकर के आशीर्वाद से परशुराम माता देवी रेणुका ने एकविरा देवी के रूप में इस स्थान पर अवतार लिया।
• आगरी–कोळी और अन्य समाजों की मान्यता:
आगरी-कोळी तथा अन्य समाजों के लोग देवी से मन्नत (नवस) मांगते हैं और मन्नत पूर्ण करने के लिए यहाँ आते हैं तथा देवी के मंदिर में मुर्गे की बलि चढ़ाते हैं।
• ठाकरे परिवार की कुलदेवता:
यह देवी बालासाहेब ठाकरे के घराने अर्थात ठाकरे परिवार की कुलदेवता है।
• पूर्ण प्रदक्षिणा संभव नहीं:
इस मंदिर की पूर्ण प्रदक्षिणा करना संभव नहीं है।
• चंपा (चाफा) का वृक्ष:
मंदिर प्रांगण में एक चंपा का वृक्ष दिखाई देता है। देवी के भक्त इस वृक्ष की पूजा करते हैं।
कार्ला बौद्ध लेणियाँ
• लेणियाँ (गुफाएँ):
एकविरा देवी मंदिर के पीछे की ओर बौद्ध लेणियाँ देखने को मिलती हैं।
• सिंह स्तंभ:
मंदिर के पीछे लेणियाँ देखने जाने के लिए टिकट लेना पड़ता है। आगे बढ़ने पर स्तंभ दिखाई देते हैं। विभिन्न स्थानों पर स्थित लगभग 45 फुट ऊँचे स्तंभों के ऊपरी भाग में चक्र, उस पर सुंदर नक्काशी तथा शीर्ष भाग में सिंह मुद्रा दिखाई देती है।
यह स्तंभ सारनाथ के स्तंभ के समान प्रतीत होता है। इसके पास सुंदर तथा कुछ अपूर्ण स्तंभ भी देखने को मिलते हैं।
• हाथी शिल्प:
स्तंभ के पीछे की ओर हाथियों की शिल्पाकृतियाँ देखने को मिलती हैं। समय के साथ असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए आक्रमणों में इनमें से कुछ शिल्प क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
• मिथुन शिल्प:
इस स्थान पर नर–नारी की रासलीला दर्शाने वाली कुछ मिथुन शिल्पाकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं।
• गौतम बुद्ध और उनके शिष्यों की शिल्पाकृतियाँ:
लेणियाँ देखते समय गौतम बुद्ध तथा उनके शिष्यों की उकेरी हुई शिल्पाकृतियाँ भी दिखाई देती हैं।
• चैत्यगृह और स्तूप:
सिंह स्तंभ के पीछे की ओर एक चैत्यगृह दिखाई देता है। ये बौद्ध लेणियाँ हैं। यहाँ उत्कृष्ट जालीदार कमान, अंदर की ओर अनेक साइड स्तंभ, ऊपर अर्धवृत्ताकार कमान और सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।
मध्य भाग में एक कोरीव स्तूप है, जिसके ऊपर सुंदर लकड़ी की संरचना दिखाई देती है। साथ ही कमल पर विराजमान गौतम बुद्ध की शिल्पाकृति भी देखने को मिलती है।
• लेणी क्रमांक 2:
यह लेणी अपूर्ण अवस्था में है।
• बुद्ध मूर्ति और ध्यान कक्ष:
यहाँ गौतम बुद्ध की शिल्पाकृति देखने को मिलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि बुद्ध धर्म का प्रचार करने वाले भिक्षु एवं भिक्षुणियों के उपासना, ध्यान और निवास हेतु यह कक्ष बनाया गया था। विश्राम के समय यहाँ बुद्ध वाङ्मय का पठन भी किया जाता था।
• विहंगम दृश्य:
ध्यान कक्ष देखने के बाद सीढ़ी मार्ग से ऊपर जाने पर कुछ अन्य बौद्ध लेणियाँ तथा एकविरा देवी मंदिर परिसर और आसपास का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
कार्ला लेणियाँ और एकविरा देवी मंदिर का ऐतिहासिक विवरण
• अनेक धार्मिक ग्रंथों में एकविरा देवी के इस स्थान पर प्रकट होने का उल्लेख मिलता है, ऐसा यहाँ के भक्त और पुजारी मानते हैं।
• इस स्थान पर एकविरा देवी मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा द्वापर युग में किया गया था।
• ईसा की पहली से पाँचवीं शताब्दी के दौरान यहाँ के स्थानीय शासकों के संरक्षण में इन लेणियों का निर्माण कराया गया।
• यहाँ कुछ शिलालेख भी उत्कीर्ण हैं, जिनमें ब्राह्मी लिपि पाई जाती है।
• चैत्यगृह में अंकित शिलालेख का संदेश:
‘वेजयंतितो सेठीना भूतपालेन सेलघरम परिनिठापितम जिंबुदिपम्ही उत्तम।’
अर्थ:
वैजयंती के श्रेष्ठ भूतपाल द्वारा निर्मित यह लेणी जंबूद्वीप (भारत) में श्रेष्ठ है।
शिल्पों से प्राप्त जानकारी
• शिल्पों से यह ज्ञात होता है कि उस काल में स्त्रियाँ सिर पर पल्लू लेती थीं और कमर में साड़ी जैसा वस्त्र धारण करती थीं, जबकि पुरुष मुंडासा और धोती पहनते थे।
• स्त्रियाँ कुंकुम लगाती थीं, यह शिल्पों के ललाट पर बने तिलक से स्पष्ट होता है।
• स्त्रियाँ कर्णफूल, अनेक मालाएँ, मोतियों के हार, तोड़े, चूड़ियाँ, मेखला आदि आभूषण पहनती थीं।
• उस समय सुंदर केश-सज्जा भी प्रचलित थी।
• यहाँ वर्तमान में अस्तित्व में रहने वाले कुछ गाँवों के तत्कालीन नाम भी शिलालेखों में मिलते हैं—
जैसे सोपारा (सोपरकर), करंजगाँव (करिजक), दहानू (धेनुकाकट), गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र का प्रभासतीर्थ (प्रभास), उत्तर कर्नाटक (वैजयंती), मावळ प्रदेश (मामलाहारे), सुतार कार्य (वढ्की) तथा सुगंधित पदार्थों के व्यापारी (गंधक) आदि के उल्लेख मिलते हैं।
• 26 मई 1909 को भारत सरकार द्वारा कार्ला लेणी समूह को महाराष्ट्र राज्य के ऐतिहासिक विरासत स्थलों में सम्मिलित किया गया।
इस प्रकार कार्ला लेणियाँ और देवी एकविरा मंदिर का यह संपूर्ण विवरण है।
Karla Leni and Ekvira Devi Temple information in Marathi

































कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा
ही एक वैयक्तिक माहितीपर वेबसाईट आहे. येथे दिलेली माहिती अभ्यास व संदर्भासाठी आहे.
अधिकृत माहितीसाठी संबंधित सरकारी संकेतस्थळ पाहावे.